Aarti hanuman ji ki : आरती किजै हनुमान लला की

Aarti hanuman ji ki-

हेलो दोस्तों वेलकम बैक आज एक बार फिर मैं आपके लिए ले आया हूं एक भजन के लिरिक्स।
आज हम जिस भजन के लिरिक्स को देखने वाले हैं वह एक आरती है जिसका नाम है "आरती हनुमान जी
की"।


इस आरती के बोल बहुत ही प्यारे हैं इस आरती में हनुमान जी का बहुत ही खूबसूरती से वर्णन किया है और यह बताया है कि वह कितने बलशाली एवं कितने महान हैं।

यह आरती बहुत ही प्रसिद्ध आरती है और इसे हर घर में, मंदिर में, तीर्थ स्थलों पर गाया जाता है
इस आरती का प्रमुख उल्लेख सुंदरकांड में दिया हुआ है अतः यह प्रचलित होने के बाद अलग से गाया जाने
लगा।


जैसा कि हम सभी जानते हैं कि हनुमान जी का एक और प्रसिद्ध नाम है उन्हें संकट मोचन के नाम से भी
जाना जाता है


हनुमान जी से जुड़ी हुई कई किस्से और कहानियां है, कई कहानियां तो बहुत ही प्रसिद्ध और मजेदार हैं।
भक्तगण इनकी पूजा अर्चना विशेषकर मंगलवार और शनिवार को करते हैं यह माना जाता है कि मंगलवार
और शनिवार को पूजा अर्चना करने से बजरंगबली प्रसन्न होते हैं।


श्री हनुमान जी के शौर्य और चरित्र का वर्णन करना वास्तव में संभव ही नहीं है तो आइए अब ज्यादा देर ना
करते हुए देखते हैं आरती हनुमान जी की।


Aarti hanuman ji ki



श्री हनुमान जी की आरती -



आरती किजै हनुमान लला की 
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ।।

जाके बल से गिरवर कापै ।
रोग दोष जाके निकट न झांके।।

अंजनी पुत्र महाबल दाई ।
संतन के प्रभु सदा सहाई ।।

दे बीरा रघुनाथ पठाये ।
लंका जारी सिया सुधि लाए ।।

लंका सो कोटि समुद्र सी खाई ।
जात पवनसुत बार न लाई ।।

लंका जारी असुर संहारे ।
सियाराम जी के काज सवारे ।।

लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे ।
आनि सजीवन प्रान उबारे ।।

पैठी पताल तोरि जम-कारे ।
अहिरावण की भुजा उखारे ।।

बाएं भुजा असुर दल मारे ।
दाहिने भुजा संत जन तारे ।।

सुन नर मुनि आरती उतारे ।
जै जै जै हनुमान उचारे ।।

कंचन थार कपूर लौ छाई ।
आरती करत अंजना माई ।।

जो हनुमान जी की आरती गावै ।
बसी बैकुंठ परमपद पावै ।।

लंक विध्वंस किन्ह रघुराई ।
तुलसीदास प्रभु कीरती गाई ।।

इति श्री हनुमान जी की आरती


दोस्तों तो यह थी आरती हनुमान जी की जिसमें उनकी वीरता शक्ति और शौर्य का वर्णन किया गया है इस
आरती का गान करने से भक्तों के सभी कष्ट और संकट दूर होते हैं। श्री हनुमान जी की आरती करने के साथ-
साथ हमें हनुमान चालीसा का पाठ भी करना चाहिए इससे हमें जीवन में प्रसन्नता तो मिलती ही है एवं साथ-साथ बुद्धि, विवेक, धैर्य और साहस भी प्राप्त होता है।

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